बाल विकास की अवस्थाएं

बाल विकास का अर्थ केवल बच्चों के शारीरिक आकार में वृद्धि होना नहीं है, बल्कि यह एक ऐसी व्यापक प्रक्रिया है, जिसमें बालक के शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और संवेगात्मक पहलुओं में प्रगतिशील परिवर्तन होते हैं। शैशवावस्था के बाद बालक की बाल्यावस्था प्रारंभ होती है। 6 वर्ष से 12 वर्ष तक की अवस्था को बाल्यावस्था कहा जाता है। मनोवैज्ञानिकों ने बाल्यावस्था को व्यक्ति के जीवन की निर्माणकारी अवस्था बताया है। कहा जाता है कि इस अवस्था में बालक में जो आदतें विकसित हो जाती हैं, उनमें आगे जाकर परिवर्तन करना बड़ा ही कठिन होता है। इस अवस्था को जीवन का अनोखा काल कहा जाता है।

बाल विकास का अर्थ एवं परिभाषाएं

बाल विकास मनोविज्ञान की वह शाखा है, जो गर्भधारण से लेकर किशोरावस्था के अंत तक बालक के व्यवहार, उसकी क्षमता और विकास के विभिन्न चरणों का अध्ययन करता है।

क. बहुमुखी प्रक्रिया – इसमें शारीरिक वृद्धि (लंबाई, वजन) के साथ-साथ मानसिक योग्यता, भाषा और व्यवहार में सुधार सम्मिलित है।

ख. परिवर्तन का स्वरूप – यह प्रक्रिया पूर्ण निर्भरता से पूर्ण आत्मनिर्भरता की ओर ले जाती है।

बाल विकास की परिभाषाएं

क्रो एवं क्रो के अनुसार – बाल मनोविज्ञान वह वैज्ञानिक अध्ययन है, जो व्यक्ति के विकास का अध्ययन गर्भकाल के प्रारंभ से किशोरावस्था की प्रारंभिक अवस्था तक करता है।

जेम्स ड्रेवर के अनुसार – बाल मनोविज्ञान, मनोविज्ञान की वह शाखा है, जिसमें जन्म से परिपक्वता तक विकसित हो रहे मानव का अध्ययन किया जाता है।

वर्क के अनुसार – बाल विकास एक ऐसा क्षेत्र है, जो गर्भाधान से लेकर वयस्कता की ओर बढ़ने तक मनुष्य में होने वाले सभी परिवर्तनों को समझने के लिए समर्पित है।

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