भाषा के माध्यम से ही व्यक्ति अपने विचारों का आदान-प्रदान कर सकता है तथा व्यक्ति को सामाजिक, शारीरिक, मानसिक और शैक्षिक सभी क्षेत्रों में लाभ प्राप्त होता है।
- सामाजिक संबंधों में भाषा का महत्व — भाषा के माध्यम से बालक अपनी बात दूसरों से कह सकता है तथा दूसरों की बात समझ भी सकता है। वाणी द्वारा वह सामाजिक मूल्य, नियमों और आदर्शों आदि को सीखता है, अतः समाज में समायोजन करने में सफल होता है।
एलिस — भाषा वह प्राथमिक माध्यम है, जिसके द्वारा व्यक्ति अपने समाज को प्रभावित करता है तथा समाज से प्रभावित होता है। - आत्म-मूल्यांकन में महत्व — बालक जब अपने परिवार में, खेल-समूह में अथवा अन्य किसी समूह में होता है, उस समय दूसरे लोग उसके संबंध में क्या बोलते हैं और किस प्रकार की मौखिक तथा शारीरिक अभिव्यक्ति करते हैं, इससे वह सरलता से यह जान सकता है कि लोग उससे और उसकी वाणी से कितना प्रभावित हुए हैं।
- शैक्षिक उपलब्धि में महत्व — बालक को कैसे बोलना है, क्या बोलना है, उसका शब्द-भंडार कितना है—इन सभी बातों से उसकी शैक्षणिक उपलब्धि प्रभावित होती है। जिसका शब्द-भंडार बड़ा होता है, उसका वाक्य-विन्यास तथा भाषा-प्रस्तुतीकरण अच्छा होता है।
- नेतृत्व के विकास में सहायक — भाषा के माध्यम से कोई भी व्यक्ति अपने समूह का नेता बन सकता है। वह अपनी बात दूसरों को समझा सकता है तथा दूसरों की बात को सुन सकता है। जो व्यक्ति विचारों को कुशलतापूर्वक अभिव्यक्त कर लेते हैं, उनकी वाणी लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर लेती है। अतः नेतृत्व गुणों के विकास में भाषा सहयोग प्रदान करती है।
- व्यक्ति विकास में सहायक — भाषा व्यक्ति-विकास की आधारशिला है। जो बालक अपने विचारों का प्रकटीकरण सीमित, संतुलित तथा प्रभावशाली भाषा में करते हैं, वे जीवन में विकास की ओर बढ़ते हैं तथा उनका व्यक्तित्व भी प्रभावशाली होता है।
- सामाजिक मूल्यांकन में महत्व — जिस प्रकार सामाजिक परिस्थितियों में बालक दूसरों की वाणी सुनकर अपना आत्म-मूल्यांकन करता है, ठीक उसी प्रकार वह क्या बोलता है और उसकी वाणी कैसी है, इस आधार पर समाज के अन्य लोग उसका मूल्यांकन करते हैं।