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शैक्षिक समानता का परिचय
शैक्षिक अवसरों की समानता का अर्थ है राज्य द्वारा देश के सभी बच्चों के लिए स्थान जाति धर्म अथवा लिंग आदि किसी भी आधार पर भेद किए बिना एक निश्चित स्तर तक की शिक्षा अनिवार्य एवं निशुल्क रूप से सुलभ कराना और उनकी इस शिक्षा प्राप्त करने में आगे आने वाली कठिनाइयों का निवारण करना साथ ही देश के सभी बच्चों और युवकों को इससे आगे की शिक्षा उनकी रुचि रुझान योग्यता क्षमता और आवश्यकता अनुसार सुलभ कराना और उनकी इस शिक्षा प्राप्त करने में आने वाली कठिनाइयों का निवारण करना ही शैक्षिक अवसरों की सामान्य कहलाता है
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भारत में शैक्षिक अवसरों की समानता
  • ऑपरेशन ब्लैकबोर्ड कार्यक्रम :-
    इस कार्यक्रम का प्रारंभ केंद्र सरकार द्वारा 1986 में किया गया। इसका उद्देश्य प्राथमिक विद्यालयों को आवश्यक सुविधाएं प्रदान करना था। इसके अंतर्गत—

    1. विद्यार्थियों को अध्ययन के लिए आवश्यक शिक्षण सामग्री जैसे ब्लैकबोर्ड, मानचित्र, चार्ट, खिलौने एवं कार्य-अनुभव के उपकरण उपलब्ध कराना।
    2. कम से कम 50% अध्यापकों में महिला अध्यापकों की भागीदारी सुनिश्चित करना, ताकि बालिकाओं के नामांकन में वृद्धि हो सके।
    3. जिन विद्यालयों में 100 से अधिक विद्यार्थी नामांकित हों, वहां अतिरिक्त अध्यापक के वेतन की व्यवस्था करना।
  • जिला प्रारंभिक शिक्षा कार्यक्रम (DPEP) :-
    यह केंद्र सरकार की योजना है, जिसका शुभारंभ 1994 में किया गया। इसका मुख्य उद्देश्य प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था में सुधार करना तथा प्राथमिक शिक्षा के सार्वभौमीकरण को सुनिश्चित करना है।
  • सर्व शिक्षा अभियान (SSA) :-
    यह योजना पूरे देश में प्राथमिक शिक्षा के सार्वभौमीकरण हेतु प्रारंभ की गई। इसका प्रमुख उद्देश्य वर्ष 2010 तक संतोषजनक गुणवत्ता के साथ सभी बच्चों को प्राथमिक शिक्षा उपलब्ध कराना था।
  • स्कूल चलो अभियान :-
    इस अभियान का शुभारंभ 1996 में किया गया। यह सर्व शिक्षा अभियान का एक महत्वपूर्ण भाग है। इसका उद्देश्य कक्षा 1 से 8 तक के बच्चों को विद्यालय की ओर आकर्षित करना है। इसके अंतर्गत अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं अल्पसंख्यक वर्ग के बच्चों के लिए छात्रवृत्ति की व्यवस्था की गई तथा मध्याह्न भोजन योजना का विस्तार किया गया।
  • मध्याह्न भोजन योजना :-
    यह केंद्र सरकार की योजना है, जिसका शुभारंभ 15 अगस्त 1995 को तमिलनाडु से किया गया। इसका मुख्य उद्देश्य बच्चों के पोषण स्तर में सुधार करना तथा गरीब बच्चों को नियमित रूप से विद्यालय आने के लिए प्रेरित करना है।
  • राष्ट्रीय साक्षरता मिशन :-
    इस मिशन का शुभारंभ 1988 में किया गया। इसका मुख्य उद्देश्य 15 से 35 वर्ष आयु वर्ग के लोगों को कार्यात्मक (प्रयोजनमूलक) साक्षरता प्रदान करना है।
  • कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय योजना :-
    इस योजना का प्रारंभ 2004 में किया गया। इसके अंतर्गत अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग तथा अल्पसंख्यक वर्ग की बालिकाओं के लिए आवासीय उच्च प्राथमिक विद्यालय स्थापित करने का प्रावधान किया गया है।
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