बाल विकास की अवस्थाएं

बाल विकास एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है, जिसे मनोवैज्ञानिकों ने आयु और विकासात्मक परिवर्तनों के आधार पर विभिन्न अवस्थाओं में विभाजित किया है। सामान्यतः बाल विकास की अवस्थाएं निम्न प्रकार हैं—

1. प्रसव पूर्व अवस्था – इस अवस्था में शारीरिक संरचना का विकास तेजी से होता है। गर्भाधान से जन्म तक लगभग 9 महीने या 280 दिन की अवधि होती है।

2. शैशवावस्था – जन्म से 2 वर्ष (कुछ मनोवैज्ञानिकों ने इसे 5–6 वर्ष तक माना है)। इसमें बच्चा पूरी तरह से माता-पिता पर निर्भर होता है। शारीरिक के साथ-साथ संवेगात्मक और संज्ञानात्मक क्रियाओं में तीव्रता आती है।

3. बाल्यावस्था – इसे मुख्य रूप से दो उप-अवस्थाओं में बांटा गया है—
क. पूर्व बाल्यावस्था – इसकी अवधि 2 से 6 वर्ष होती है। इस दौरान बच्चा प्रतीकात्मक रूप से सोचना प्रारंभ कर देता है तथा भाषा कौशल का भी विकास हो जाता है।
ख. उत्तर बाल्यावस्था – इसकी अवधि 6 से 12 वर्ष तक होती है। इस अवस्था में बालक में तार्किक चिंतन का विकास हो जाता है, समूह निर्माण की भावना आती है तथा सामाजिकता का विकास होता है।

4. किशोरावस्था – इसकी अवधि 12 से 18 वर्ष तक होती है। यह तीव्र शारीरिक, मानसिक और संवेगात्मक परिवर्तनों का काल कहा जाता है।

स्टैनले हॉल के अनुसार – तनाव, दबाव और तूफान की अवस्था को किशोरावस्था कहा जाता है।

Scroll to Top