समानता का अर्थ है कि सभी व्यक्तियों को बिना किसी भेदभाव के समान अवसर, अधिकार और सम्मान प्राप्त हो। यह एक सामाजिक एवं कानूनी सिद्धांत है, जो समाज में बराबरी सुनिश्चित करता है, तथा इसका उद्देश्य यह है कि प्रत्येक व्यक्ति को अपनी प्रतिभा विकसित करने के लिए समान अवसर प्राप्त हो।
शिक्षा में समानता का महत्व :-
- लोकतंत्र की रक्षा के लिए :-
लोकतंत्र की सफलता उसके नागरिकों पर निर्भर करती है। नागरिकों की योग्यता और क्षमता, शिक्षा पर आधारित होती है। अतः देश के प्रत्येक नागरिक को शिक्षित करना आवश्यक है। - व्यक्ति के व्यक्तित्व के विकास के लिए :-
लोकतंत्र व्यक्ति के व्यक्तित्व विकास का सम्मान करता है और प्रत्येक व्यक्ति को अपने विकास के स्वतंत्र अवसर प्रदान करता है। लेकिन वर्तमान स्थिति में देश की आधे से अधिक जनसंख्या पिछड़ी एवं निर्धन है, जो अच्छी शिक्षा से वंचित है। - समाज के उन्नयन के लिए :-
लोकतंत्र सामाजिक वर्ग-भेद का विरोधी है। यह पूरे राष्ट्र को एक समाज मानता है और उसे सशक्त एवं सांस्कृतिक रूप से विकसित करने में विश्वास रखता है। यह तभी संभव है, जब देश के प्रत्येक नागरिक को शिक्षा प्राप्त हो। इसके लिए शैक्षिक अवसरों की समानता अत्यंत आवश्यक है। - राष्ट्र के आर्थिक विकास के लिए :-
किसी देश का आर्थिक विकास दो तत्वों पर निर्भर करता है—प्राकृतिक संसाधन और मानव संसाधन। प्राकृतिक संसाधन प्रकृति की देन हैं, जबकि मानव संसाधन का विकास शिक्षा के माध्यम से होता है। - वर्ग-भेद की समाप्ति के लिए :-
स्वतंत्रता प्राप्ति से पहले हमारे देश में शिक्षा केवल उच्च वर्ग तक सीमित थी। इसका परिणाम यह हुआ कि जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में उच्च वर्ग का वर्चस्व बढ़ता गया। लोकतंत्र इस प्रकार के सामाजिक एवं आर्थिक वर्ग-भेद का विरोध करता है।