संविधान का अर्थ :-
सम् + विधान = संविधान।
सम् = समान, विधान = नियम/कानून (सभी के लिए समान)।
दूसरे अर्थ में सम्यक + विधान = संविधान, अर्थात सुव्यवस्थित नियमों की व्यवस्था।
सरल शब्दों में संविधान देश को चलाने वाली नियम पुस्तिका (Rule Book) है।
संविधान की परिभाषा :-
विद्वानों ने संविधान को अलग-अलग प्रकार से परिभाषित किया है।
- अरस्तू के अनुसार – “संविधान वह व्यवस्था है, जो राज्य के कार्यों तथा नागरिकों के अधिकारों को निर्धारित करता है।”
- गार्नर के अनुसार – “संविधान उन मूल नियमों और सिद्धांतों का संग्रह है, जिनके अनुसार राज्य का शासन संचालित होता है।”
संविधान की आवश्यकता :-
किसी भी देश के शासन को चलाने के लिए संविधान अत्यन्त आवश्यक है। इसकी आवश्यकता अनेक कारणों से होती है—
(1) शासन व्यवस्था को व्यवस्थित करने के लिए।
(2) नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए।
(3) सरकार की शक्तियों को सीमित करने के लिए।
(4) न्याय और समानता स्थापित करने के लिए।
(5) राष्ट्रीय एकता बनाए रखने के लिए।
(6) लोकतंत्र की रक्षा के लिए।
(7) नागरिकों के कर्तव्यों का ज्ञान कराने के लिए।