सृजनात्मकता के मुख्य चार तत्व हैं— 1. प्रवाह 2. लचीलापन 3. मौलिकता और 4. विस्तारण।
ये तत्व मिलकर किसी व्यक्ति को कुछ नया, अनोखा और उपयोगी सोचने या बनाने में सक्षम बनाते हैं। वर्तमान में इन्हीं तत्वों के मापन द्वारा व्यक्ति की सृजनात्मक शक्ति का पता लगाया जाता है। अतः यहाँ उनका वर्णन संक्षेप में प्रस्तुत है।
- प्रवाह (Fluency) – किसी समस्या के हल अथवा किसी वस्तु के निर्माण के लिए निरंतर प्रयत्नशील बने रहने को प्रवाह कहते हैं। सृजनात्मक व्यक्तियों के चिंतन में प्रवाह होता है।
- विविधता/लचीलापन (Flexibility) – किसी वस्तु को अनेक रूपों में प्रस्तुत करने अथवा किसी समस्या के अनेक हल प्रस्तुत करने की क्षमता को विविधता कहते हैं। टॉरेंस के अनुसार, जिन व्यक्तियों में यह क्षमता होती है, उनमें सृजनात्मकता होती है।
- मौलिकता (Originality) – मौलिकता का संबंध नवीनता से होता है। किसी वस्तु को नया रूप देने, किसी नए विचार को प्रस्तुत करने की शक्ति को मौलिकता कहते हैं। टॉरेंस की दृष्टि से मौलिकता सृजनात्मकता का सबसे अधिक महत्वपूर्ण तत्व होता है।
- विस्तारण (Elaboration) – किसी विचार को अपने अनुभवों के आधार पर विस्तृत व्याख्या करने को विस्तारण कहते हैं। लॉरेंस के अनुसार, सृजनात्मक व्यक्ति द्वारा प्रस्तुत व्याख्या में नवीनता और मौलिकता होती है।
सृजनात्मकता के कुछ अन्य तत्व भी होते हैं, जिनके आधार पर भी सृजनात्मकता का मापन किया जा सकता है। संक्षेप में उनका वर्णन इस प्रकार है—
- संवेदनशीलता (Sensitivity) – जिन व्यक्तियों में संवेदनशीलता होती है, वे सृजनात्मक होते हैं, विशेषकर परिवर्तन के प्रति।
- नवीनता (Novelty) – नवीनता सृजनात्मकता का महत्वपूर्ण तत्व है। जब तक व्यक्ति में नवीनता के प्रति आकर्षण नहीं होगा, वह नवीन सृजन नहीं कर सकता।
- स्वतंत्र निर्णय (Self decision) – सृजनशील व्यक्तियों में आत्मविश्वास होता है। वे आत्मनिर्भर होते हैं और स्वतंत्र रूप से निर्णय लेते हैं।
- पुनर्परिभाषीकरण (Redefinalization) – इसका अर्थ है किसी वस्तु पर किए गए विचार को पूर्व प्रचलित रूप में प्रस्तुत न कर उसे नए रूप में प्रस्तुत करना।
- सृजनात्मक उत्पादन (Creative production) – सृजनात्मकता का मूल तत्व सृजनात्मक चिंतन होता है। इसी से व्यक्ति नए विचार, नई रचना और नए उत्पादन करने में सफल होते हैं।